Saturday, 13 August 2011

फिर भी हम स्वतंत्र है !!!



फिर भी हम स्वतंत्र है !!!

आजादी की हर सालगिरह पर
हम स्वतंत्रता का जश्न मनाते है ....
जिनके गुलाम थे जिन्होंने गुलामी दी ,
उन्हें हम अतिथि बनाकर देश बुलाते है ....
आज भी रानी के प्रशंसा के
कसीदे काढ़े जाते है .....
उनके राजकुमार की शादी हो या
ताज के पास तस्वीर उतरवाना,
हम मुखपृष्ठ पर समाचार बनाते है .....
अपनी मातृभाषा को भूलकर ,
अंग्रेजीदां होना अपनी आधुनिकता बताते है.....
पुरातन आदर्श-भरी संस्कृति छोड़कर
उनकी विलासिता अपनाने में गर्व जताते है ....
शहीदों की समाधि पर उनके पुष्पार्पण को
आज की ताज़ा खबर बनाते है....
सोचते है हमारी आजादी का यही मतलब है !!!

वैचारिक गुलामी है,मन से परतंत्र हैं,......
खुशियों का अवसर है,फिर भी हम स्वतंत्र हैं ........

वैश्वीकरण की दौड़ में ,
अपनी स्थिर अर्थव्यवस्था को धत्ता बताकर,
"ऋणं लेकर घृतं  पीवेत " की चरक प्रवृति
को विकसित होने का मूल मंत्र बताते हैं.....
गरीबी और भूख से कई विदर्भ बने पर,
कॉमन-वेल्थ खेल में करोडो लुटाने में ,
देश और भारतीयता की शान बताते हैं....
बेटो की चाह में कई बेटियां कुर्बान कर के ,
बालिका मुफ्त-शिक्षा योजना चलाते हैं.....
आर्थिक ,सामाजिक ,शारीरिक शोषण कर
"यत्र नार्यस्ते पूजते तत्र वसते देवता "
के हमे गीत सुनाते हैं.....
भाई -भाई में झगड़े है,मर कटने का फसाना है,
अहम् की लड़ाई में देश के टुकड़े करने का अफसाना है,

समाज में कई बेडिया हैं,अपना श्रेष्ठ प्रजातंत्र है.......
आजादी के तराने छेड़ो,फिर भी हम स्वतंत्र हैं.............

शहीदों के मर मिटने की शहीद-वाणी ......

भारतीयता का जज्बा कायम अगर रखना है,
भारत को गर दुनिया में विकसित देश बनना है,
कश्मीर से कन्याकुमारी  अखंड  अगर करना है,
भारतीय संस्कृति का परचम दुनिया में लहराना है !

आपस में लड़े नहीं सबमें भाईचारा हो,
सर्व- धर्म समभाव हमारे देश का नारा हो ,
देश की बागडोर शिक्षित युवाओं के हाथ हो,
न्यायपालिका सदा निष्पक्ष और अपने साथ हो,
परमाणु की दौड़ में हम ना अग्रसर हों,
रोटी ,छत ,पानी सब के घर- घर हो,
मुफ्त शिक्षा, ईमानदारी हम सब की रीत हो ,
 सबके दिलो को जीतना सब से बड़ी जीत हो,

गाँधी,सुभाष की कुर्बानी का यही मूलमंत्र है,
गर्व से हम बोलेंगे ,हाँ ! हम स्वतंत्र हैं !!!

7 comments:

sam said...

“Long years ago, we made a tryst with destiny and now the time comes when we shall redeem our pledge... At the stroke of the midnight hour, when the world sleeps, India
will awake to life and freedom.”

sam said...

A very nice poetry HAPPY INDEPENDENCE DAY...

अरुण चन्द्र रॉय said...

प्रभावशाली और समीचीन कविता

Ajit Sinha said...

Bahut sunder...

Ajit Sinha said...

Bahut sunder...

Ruby Thakur said...

Nice poem

Ruby Thakur said...

Nice poem