Tuesday, 24 January 2012

आशा के दीप !!!


सांस थमती नहीं वक़्त रुकता नहीं
दर्दे -दिल के समंदर से कसक सी उठी
हम बिखरने लगे वो  कहा चल दिए   
एक हुक सी उठी ,हमारे संसार में 
ना दवा लगी ना दुआ लगी
फ़रियाद करती रही तेरे दरबार में,
गिला भी किससे करे,जब तुझसे ही तूफ़ान मिला,
तुम्हारे दर पर खड़ा   राही मंझधार में,
 तेरे बन्दे है हम,तुमने जिंदगी में रंग भरे,
फिर तेरे हाथो ये कैनवास बदरंग क्यों हुआ,
सवाली ठिठका  रहा ,जबाब ढूढता रहा....

एक पल को ऐसा लगा
जीना  दुश्वार है,उस  बिन मेरा सूना संसार है
पर हसना भी है,हम कठपुतली जो है
कौन अपना यहाँ  कौन पराया यहाँ
एक पल खुशिया मिली तो उसे जिए चलो
अगर दुःख भी मिले तो गम पिए  चलो....


जब याद करती हूँ  उन्हें, तो रीता है सब
एक पल भूलता नहीं ,अतीत औ  बीता हुआ पल
जब सामने देखती हूँ नया सवेरा आने को है
काली रात के  बाद सुबह की लालिमा आने को है,
मेरे हाथो में ताकत है हमारे  भविष्य को बनाने की
सुनी सुनी बगिया में फिर से दीप जलाने की
एक विश्वास जो टुटा था तेरी शक्ति का
उस विश्वास की जोत फिर से जगाई है मैंने
राही हु इस कर्मपथ की,रुकना तो है नहीं
तो ठहर के आंसुओ में वक़्त क्यों जाया करू,
आगे बढ़ू,नया सवेरा फिर से निकला है
नयी आशाएं  ,नयी उमंगो के साथ



1 comment:

sanjay rai said...

har raat ki subah hoti hai......jindagi rukane ka naam nahi hai , ye wo path hai jo nirantar chalata rahata hai