Sunday, 18 September 2011

तेरी याद आई ऐसे !!!

तेरी याद आई ऐसे !!!


इस दौड़ते जीवन के सफ़र में तेरी सुहानी याद आई ऐसे ,
थकते मुसाफिर  को दो पल सुकून के मिल गए हो जैसे !

तेरे मेरे  संग   होने  का अहसास मन को छू गया ऐसे ,
सर्द मौसम में गुनगुनी धूप का खुशनुमा स्पर्श हो जैसे !

तेरी आँखों में अपना  अश्क  देख  मुझे    लगा  ऐसे ,
निर्मल झील में रक्त  कुमुदिनी खिल रही  हो जैसे !

तेरे दूर  होने के ख्याल  भर से  दिल  छलका  ऐसे ,
हरी-हरी  दूब  पर ओस की बूंदे दमक रही हो जैसे !

तेरे प्यार  की  ख़ुशी से  तन-मन सुरभित हुआ ऐसे,
 महकते  गुलाब से  चमन सुवासित  हुआ हो जैसे!

समय की फिसलती रेत पर तेरी तस्वीर उकेरी है ऐसे,
नदी किनारे शिला-खंड को लहरों ने तराशा हो जैसे !

अधखुले नैनो में स्वप्न की तुलिका ने रंग भरे है ऐसे
हरसिंगार के फूलों ने केसरिया रंग बिखेरे  हैं  जैसे !


तेरी  प्रीत  में   मेरा   यायावर  मन  बन्ध  गया  है   ऐसे,
समंदर  में  कश्ती  को  साहिल   मिल  गया   हो    जैसे !!!

5 comments:

sam said...

As always ur poem is too good.how u cerat these poems?it touched the deepest core of my heart..very nice..

sanjay rai said...
This comment has been removed by the author.
Ruby Thakur said...

kya khoob likha hai .I do agree with .sanjay

Dil ka Rishta/MPrriyadarshini said...

Thanks Sam....Although i didn't meet you but I am very much impressed with your comments.

Sanjay and Ruby,aaplog to khud hi kavi ho to mai kya bolu...always feel nice to read ur blogs and offcourse comments on my Blog.Thanks.

Anonymous said...

yaadon ke jharokhon se 1 baat aur nikli hai,aapke kavita se 1 yaad aur khili hai,bahut khoob..
kya baat kya baat kya baat
Raj..